Acme India Industries
कंपनी क्या करती है: कारोबार में ऑपरेटिंग रेवेन्यू, सब्सिडियरी/JV से आय और संबंधित-पक्षों के लेन-देन शामिल दिखते हैं। उधारी का इस्तेमाल मुख्य रूप से वर्किंग कैपिटल और कुछ वाहन फाइनेंस के लिए किया गया है।
लेखक: IPO Milega Research · प्रकाशित · अपडेट
137.93x QIB सब्सक्रिप्शन के लिए एनालिसिस स्कोर 5.6 +1.5
कंपनी के फंडामेंटल्स मध्यम दिखते हैं। मुनाफे की स्थिति अच्छी है और कर्ज़ का स्तर बेहतर हुआ है, लेकिन कवरेज रेशियो और वर्किंग कैपिटल की दक्षता घटी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा, जबकि कर्ज़ अभी भी काफी है और लिक्विडिटी सिर्फ मामूली है।
- लिस्टिंग गेन
- +12.76%
- ₹221 पर लिस्ट
- सब्सक्राइब्ड
- 124.23x
- कुल
- रिटेल चांस
- 1.2%
- 86 में 1
GMP अनौपचारिक ग्रे मार्केट संकेत है। GMP अपडेट 11 Oct, 21:53 IST.
- प्राइस बैंड
- ₹186-196
- लॉट साइज़
- 1200 शेयर
- न्यूनतम निवेश
- ₹2,35,200
- इश्यू साइज़
- 122 Cr.
- ओपन30 Sept 2026
- क्लोज़6 Oct 2026
- अलॉटमेंट7 Oct 2026
- लिस्टिंग9 Oct 2026
ओवरव्यू
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- QIB
- 137.93x
- NII
- 196.27x
- रिटेल
- 85.5x
₹236 (+20.41%)
GMP ट्रेंड
अनौपचारिक ग्रे मार्केट भाव, समय IST में
पैसा कहां जाता है
- कंपनी को
- ₹100 Cr
- नया इश्यू
- बेचने वाले शेयरहोल्डरों को
- ₹16 Cr
- ऑफर फॉर सेल
- वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतें पूरी करने के लिए फंडिंग₹38 Cr30%
- कंपनी द्वारा लिए गए उधार का पूरा या आंशिक पुनर्भुगतान और/या प्री-पेमेंट₹41 Cr33%
- अतिरिक्त प्लांट और मशीनरी की खरीद के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर की फंडिंग₹6.27 Cr5%
- सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्य₹1.46 Cr1%
- इश्यू खर्च₹22.1 Cr18%
- ऑफर फॉर सेल: बेचने वाले शेयरहोल्डरों को जाता है₹16 Cr13%
बाहरी रिंग: अनुमानित फायदा
स्कोर कैसे जुड़ता है
कुल स्कोर इन पांच का औसत है, बोली बंद होने के बाद QIB डिमांड से थोड़ा बदलता है।
- फाइनेंशियल6.0
- परफॉर्मेंस7.0
- फ्लेक्सिबिलिटी7.0
- टाइमिंग4.0
- रिस्क4.0
GMP संकेतक 15.31% है, इसलिए निकट अवधि में लिस्टिंग पर बढ़त मध्यम दिखती है। कारोबार का प्रदर्शन अच्छा है, मुनाफा लगातार बढ़ा है, EBITDA मार्जिन सुधरा है और ऑर्डर बुक अच्छी है, जिससे निवेशकों का रुझान बेहतर हो सकता है। हालांकि, Indian Railways पर ज़्यादा निर्भरता, टेंडर आधारित रेवेन्यू, मुकदमों/टैक्स विवादों, कर्ज़ और वर्किंग कैपिटल के दबाव से इन खूबियों का असर कम होता है। इसलिए बढ़त फंडामेंटल के बजाय बाजार के रुझान पर ज़्यादा निर्भर दिखती है।
मज़बूती5
- 2017 से अब तक 28 टर्नकी फर्निशिंग प्रोजेक्ट पूरे किए और 1,610 कोचों में काम किया।
- 2018 में पहला अपग्रेडेशन कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद से 1,888 कोचों का रिफर्बिशमेंट और अपग्रेडेशन किया।
- 10,948 टॉयलेट अपग्रेड यूनिट का काम पूरा किया।
- 30 जून 2026 तक 40 ऑर्डर की कुल ₹73,797.33 lakhs की ऑर्डर बुक थी।
- 16 रेलवे ज़ोन में काम करती है। इसके 3 प्रोडक्शन यूनिट और 2 मिड-लाइफ रिहैबिलिटेशन यूनिट हैं।
चिंताएं5
- रेवेन्यू और ऑर्डर बुक के लिए Indian Railways पर ज़्यादा निर्भरता के चलते कंपनी को नीतियों, टेंडर, रिन्यूअल और एक ही ग्राहक पर निर्भरता से जुड़े जोखिम हैं।
- टेंडर आधारित कॉन्ट्रैक्ट में भविष्य के रेलवे ऑर्डर मिलने, जारी रहने या मुनाफे में रहने की कोई गारंटी नहीं है।
- वारंटी, इंस्पेक्शन और क्वालिटी से जुड़ी खामियों के कारण दोबारा काम, रिप्लेसमेंट, जुर्माना और प्रोडक्ट लायबिलिटी हो सकती है। रोकी गई या वापस वसूली गई रकम से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है।
- चल रहे मुकदमों और टैक्स कार्यवाही से आकस्मिक देनदारियां, संभावित कैश आउटफ्लो और प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।
- ज़्यादा कर्ज़ और बढ़ती फाइनेंस लागत से मार्जिन और वर्किंग कैपिटल पर दबाव पड़ सकता है।
शेयर किसे मिलते हैं
- QIB50%
- NII15%
- रिटेल35%
- रिटेल न्यूनतम2,35,2002 लॉट, 1200 शेयर
- रिटेल अधिकतम2,35,2002 लॉट, 1200 शेयर
- S-HNI न्यूनतम3,52,8003 लॉट, 1800 शेयर
- S-HNI अधिकतम9,40,8008 लॉट, 4800 शेयर
- B-HNI न्यूनतम10,58,4009 लॉट, 5400 शेयर
| आवेदन | लॉट साइज़ | शेयर | रकम |
|---|---|---|---|
| रिटेल न्यूनतम | 2 | 1200 | 2,35,200 |
| रिटेल अधिकतम | 2 | 1200 | 2,35,200 |
| S-HNI न्यूनतम | 3 | 1800 | 3,52,800 |
| S-HNI अधिकतम | 8 | 4800 | 9,40,800 |
| B-HNI न्यूनतम | 9 | 5400 | 10,58,400 |
टाइमिंग
4.0/10कुल मिलाकर टाइमिंग मध्यम से कमज़ोर दिखती है। इश्यू का आकार संभालने लायक है और मॉनिटरिंग एजेंसी की मौजूदगी से प्रक्रिया में कुछ अनुशासन आता है। लेकिन खुलासों में समूह के भीतर बड़े लेन-देन, संबंधित-पक्षों के साथ लगातार लेन-देन और डायरेक्टर/KMP में कई बदलाव दिखते हैं। इससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है और अनिश्चित बाजार माहौल में इश्यू की अपील घट सकती है। सिर्फ दिए गए टेक्स्ट के आधार पर, इश्यू असाधारण रूप से मज़बूत रणनीतिक समय पर लाया गया नहीं दिखता।
- बाज़ार में आने का समय
- कंपनी सीमित ऑपरेटिंग इतिहास और जटिल संबंधित-पक्ष संरचना के साथ अपेक्षाकृत शुरुआती दौर में ही बाजार से पूंजी जुटाती दिखती है। इससे पूंजी और लिक्विडिटी की ज़रूरत का संकेत मिलता है, लेकिन यह नहीं दिखता कि बाजार का समय उसके लिए साफ तौर पर सबसे अच्छा है।
- अलॉटमेंट कैसे होता है
- अलॉटमेंट का आधार तय हो गया और शेयर डीमैट खाते में क्रेडिट किए गए
- बाज़ार का माहौल
- सामान्य
- बाज़ार में आने का समय
- 4.0
- कहां लिस्ट होगा
- BSE SME
अहम पड़ाव
- 30 Sept 2026IPO खुलने की तारीख
- 6 Oct 2026IPO बंद होने की तारीख
- 7 Oct 2026अलॉटमेंट का आधार
- 8 Oct 2026रिफंड शुरू
- 8 Oct 2026डीमैट खाते में क्रेडिट
- 9 Oct 2026लिस्टिंग की तारीख
फाइनेंशियल
6.0/10- रेवेन्यू
- ₹268 Cr
- +25.5%
- टैक्स के बाद मुनाफा
- ₹24.36 Cr
- +48.0%
- नेट मार्जिन
- 9.1%
- +1.4 पॉइंट
- एसेट्स
- ₹383 Cr
- +40.5%
- रिटर्न ऑन इक्विटी
- 23.52%
- डेट टू इक्विटी
- 0.82
- करंट रेशियो
- 1.26x
- ROCE
- 23.20%
- रिटर्न ऑन नेट वर्थ
- 23.52%
- NAV प्रति शेयर (₹)
- 59.94
- प्राइस टू बुक
- 3.27
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस ट्रेंड
रकम ₹ करोड़ मेंकंपनी के फंडामेंटल्स मध्यम दिखते हैं। मुनाफे की स्थिति अच्छी है और कर्ज़ का स्तर बेहतर हुआ है, लेकिन कवरेज रेशियो और वर्किंग कैपिटल की दक्षता घटी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा, जबकि कर्ज़ अभी भी काफी है और लिक्विडिटी सिर्फ मामूली है।
उधारी काफी है, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं। हाल में बताई गई सिक्योर्ड लोन की कुल रकम करीब ₹65.87 Cr है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से वर्किंग कैपिटल के लिए होता है। दिए गए टेक्स्ट में IPO से जुटाई रकम का इस्तेमाल कर्ज़ चुकाने के लिए करने की बात नहीं है, इसलिए इश्यू के मकसद में कर्ज़ घटाना शामिल है, इसकी पुष्टि नहीं होती।
नया इश्यू कंपनी को जाता है। OFS बेचने वाले शेयरहोल्डरों को जाता है।
प्रमोटर Suraj Pandey OFS में 8,01,600 शेयर बेच रहे हैं।
कंपनी fresh issue के ज़रिए नई पूंजी जुटा रही है, जबकि प्रमोटर OFS के ज़रिए आंशिक रूप से अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। नेट प्रोसिड्स के इस्तेमाल का ज़िक्र है, लेकिन दिए गए टेक्स्ट में इसकी जानकारी विस्तार से नहीं दी गई है।
रिस्क
4.0/10इस स्कोर को सेफ्टी रेटिंग की तरह पढ़ें: 10/10 का मतलब सबसे कम रिस्क, 1/10 सबसे ज़्यादा।
रिस्क कहां हैं
- फाइनेंशियल रिस्क3
- मार्केट रिस्क3
- ऑपरेशनल रिस्क3
- रेगुलेटरी रिस्क3
Indian Railways पर ज़्यादा निर्भरता, बड़े मुकदमे और वारंटी/टैक्स विवाद, साथ ही बढ़ती लागत से कमाई, कैश फ्लो और कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल पर बड़ा जोखिम है।
कंपनी इनसे कैसे निपटती है
ग्राहकों में विविधता लाएं, क्वालिटी और वारंटी पर नियंत्रण बेहतर करें, विवादों के लिए प्रावधान करें, दस्तावेज़ीकरण/कम्प्लायंस सुधारें और वर्किंग कैपिटल का अनुशासित प्रबंधन करके कर्ज़ घटाएं।
फाइनेंशियल रिस्क3
- लंबित टैक्स विवादों और आकस्मिक देनदारियों के चलते बड़ा कैश आउटफ्लो हो सकता है।
- ज़्यादा उधारी और बढ़ती फाइनेंस लागत से कर्ज़ का बोझ और ब्याज खर्च बढ़ता है।
- मटीरियल, कर्मचारियों, फाइनेंस और अन्य खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी से मार्जिन घट सकता है।
मार्केट रिस्क3
- Indian Railways से रेवेन्यू पर निर्भरता के चलते कंपनी एक ही ग्राहक वर्ग पर निर्भर है।
- टेंडर आधारित कारोबार में बोली स्वीकार होने और कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होने को लेकर अनिश्चितता रहती है।
- रेल मंत्रालय/GoI की नीतियों या खरीद प्रक्रिया में बदलाव से कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ऑपरेशनल रिस्क3
- क्वालिटी, इंस्पेक्शन, वारंटी और प्रोडक्ट में खामियों से दोबारा काम, रिकॉल, जुर्माना और पेमेंट रोके जाने की नौबत आ सकती है।
- प्रोजेक्ट आधारित रेलवे कॉन्ट्रैक्ट में देरी, काम पूरा करने से जुड़ी समस्याओं और कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने का जोखिम रहता है।
- मौसमी उतार-चढ़ाव और एक या कुछ ग्राहकों पर निर्भरता से कारोबार की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
रेगुलेटरी रिस्क3
- टैक्स असेसमेंट, अपील और प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष टैक्स विवादों के चलते प्रतिकूल आदेश और जुर्माने लग सकते हैं।
- Negotiable Instruments Act के Section 138 के तहत लंबित आपराधिक शिकायतों से कानूनी और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम हो सकता है।
- कॉपीराइट और ट्रेडमार्क पर आपत्तियों/विवादों से बौद्धिक संपदा अधिकारों और उनके इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।
परफॉर्मेंस
7.0/10ACME India Industries Limited रेलवे कोच इंटीरियर के खास कारोबार में अच्छी कामकाजी क्षमता दिखाती है। FY26 में रेवेन्यू 25.6% बढ़ा, EBITDA मार्जिन सुधरकर 15.1% हुआ और ऑर्डर बुक ₹73,797.33 lakhs रही। बार-बार मिलने वाले रेलवे कॉन्ट्रैक्ट, विविध काम और ऑपरेटिंग लेवरेज से प्रदर्शन को मदद मिली है। हालांकि, अलग-अलग वर्षों में ग्रोथ एक जैसी नहीं रही और कारोबार अब भी टेंडर आधारित तथा Indian Railways के खर्च पर ज़्यादा निर्भर है।
- पुरानी ग्रोथ
- FY24 में रेवेन्यू ₹21,343.46 lakhs से बढ़कर FY26 में ₹26,370.77 lakhs हो गया। FY25 में थोड़ी गिरावट आई, फिर FY26 में तेज़ रिकवरी हुई। इसी दौरान EBITDA ₹2,957.07 lakhs से बढ़कर ₹3,981.59 lakhs हुआ, जबकि PAT ₹1,920.73 lakhs से बढ़कर ₹2,435.77 lakhs हो गया।, FY24-FY26 के दौरान रेवेन्यू CAGR करीब 11.1% और PAT CAGR करीब 12.6% रहा। FY25 में कमजोरी के बाद FY26 में रिकवरी हुई।
- बाज़ार से तुलना
- CREW और Hindustan Fibre Glass जैसे स्थापित प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ACME छोटी और नई कंपनी दिखती है, लेकिन प्रीमियम कोच फर्निशिंग, रिफर्बिशमेंट और टॉयलेट मॉडर्नाइज़ेशन में इसने अपनी खास जगह बनाई है। इसकी खूबियों में विविध सर्विस मिक्स, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग, सर्टिफिकेशन और टेक्नोलॉजी से जुड़े नए टाई-अप शामिल हैं। हालांकि, इसका ऑपरेटिंग इतिहास छोटा है और स्थापित प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कारोबार का पैमाना अभी सीमित है।
- भविष्य की संभावना
- बड़ा ऑर्डर बुक, प्लांट का कम इस्तेमाल, रेलवे मॉडर्नाइज़ेशन पर खर्च और रिपेयर, VSS, CVVRS तथा PAPIS से जुड़े अवसरों में विस्तार से संभावनाएं सकारात्मक हैं।
- ऑपरेशनल निरंतरता
- इस कारोबार की शुरुआत 2012 में प्रोपराइटरशिप के रूप में हुई और मौजूदा स्वरूप में यह 2017 से रेलवे कोच सॉल्यूशन का काम कर रहा है। रेवेन्यू और मुनाफा कुल मिलाकर सकारात्मक और बढ़ते हुए हैं, लेकिन FY25 में रेवेन्यू और PAT घटे, फिर FY26 में रिकवरी हुई। यह ठीक-ठाक, लेकिन पूरी तरह स्थिर नहीं, प्रदर्शन दिखाता है।
- अनुभव
- प्रमोटर-मैनेजिंग डायरेक्टर Suraj Pandey को इंडस्ट्री में 15 साल से ज़्यादा का अनुभव है। प्रमोटर और होल-टाइम डायरेक्टर Sadhvi Pandey को करीब 10 साल का अनुभव है। बोर्ड के सदस्यों को रेलवे/इंजीनियरिंग से जुड़े क्षेत्र में 42, 42 और 38 साल का अनुभव है।
- ट्रैक रिकॉर्ड
- मैनेजमेंट ने Indian Railways के लिए टर्नकी फर्निशिंग, रिफर्बिशमेंट और टॉयलेट अपग्रेडेशन समेत कई कॉन्ट्रैक्ट पूरे किए हैं। कंपनी को बार-बार कारोबार मिला है और इसकी ऑर्डर बुक बढ़ रही है।
अहम उपलब्धियां
- 012017 से अब तक 28 टर्नकी फर्निशिंग प्रोजेक्ट पूरे किए और 1,610 कोचों में काम किया।
- 022018 में पहला अपग्रेडेशन कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद से 1,888 कोचों का रिफर्बिशमेंट और अपग्रेडेशन किया।
- 0310,948 टॉयलेट अपग्रेड यूनिट का काम पूरा किया।
- 0430 जून 2026 तक 40 ऑर्डर की कुल ₹73,797.33 lakhs की ऑर्डर बुक थी।
- 0516 रेलवे ज़ोन में काम करती है। इसके 3 प्रोडक्शन यूनिट और 2 मिड-लाइफ रिहैबिलिटेशन यूनिट हैं।
- 06इसके पास ISO 9001:2015 और ISO 15085 सर्टिफिकेशन हैं और इसे एक नवरत्न PSU के बिज़नेस एसोसिएट के तौर पर पैनल में शामिल किया गया है।
फ्लेक्सिबिलिटी
7.0/10कंपनी टर्नकी फर्निशिंग, रिफर्बिशमेंट, टॉयलेट अपग्रेड और रेलवे के इंटीरियर पार्ट्स की सप्लाई का काम करती है। इसकी मौजूदगी 16 रेलवे ज़ोन में है और VSS तथा PAPIS जैसे टेक्नोलॉजी आधारित नए अवसरों से भी जुड़ाव है। हालांकि, Indian Railways पर ग्राहकों की निर्भरता और टेंडर आधारित खरीद से बाहरी बाजार में लचीलापन घटता है।
FY26 में रेवेन्यू बढ़कर ₹26,370.77 lakhs हुआ, जो FY25 में ₹20,999.52 lakhs था। नेट वर्थ ₹5,536.82 lakhs से बढ़कर ₹10,354.71 lakhs हो गई। EBITDA मार्जिन सुधरकर 15.10% हुआ, जो बेहतर ऑपरेटिंग मजबूती दिखाता है। हालांकि, कारोबार अब भी कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर है।
कई जगहों पर काम करने, इन-हाउस टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग, कई प्रोडक्ट लाइनों में कम क्षमता इस्तेमाल और अलग-अलग कोच वेरिएंट तथा रेट्रोफिट का काम करने की क्षमता के चलते ऑपरेशनल फुर्ती अच्छी दिखती है। कंपनी 28 टर्नकी प्रोजेक्ट, 1,888 रिफर्बिशमेंट/अपग्रेडेशन कोच और 10,948 टॉयलेट अपग्रेड पूरे कर चुकी है।
ACME India में लचीलापन मध्यम से अच्छा दिखता है। इसे रेलवे के व्यापक पोर्टफोलियो, कई सर्विस लाइनों, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित नए ऑफरिंग्स में सक्रिय विस्तार से सहारा मिलता है। टेंडर आधारित मॉडल और Indian Railways पर ज़्यादा निर्भरता इसकी पूरी आज़ादी सीमित करते हैं, लेकिन प्लांट का कम इस्तेमाल और अच्छी ऑर्डर बुक कारोबार को बढ़ाने और बदलाव अपनाने की गुंजाइश देते हैं।
- प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन
- कंपनी रेलवे कोच सेक्टर में टर्नकी फर्निशिंग, रिफर्बिशमेंट/अपग्रेडेशन/कन्वर्ज़न, टॉयलेट मॉडर्नाइज़ेशन और FRP प्रोडक्ट, सैनिटरी वेयर, एपॉक्सी फ्लोरिंग, DGFRP, टॉयलेट डोर, इंटरकम्युनिकेशन डोर, फायर बैरियर कोटिंग, ब्रेल साइनेज और VCBs के मैन्युफैक्चरिंग/सप्लाई का विविध कारोबार करती है। खास तरह के दरवाज़ों, कोटिंग और PAPIS से जुड़े अवसरों के लिए इसकी साझेदारियां भी हैं।
- भविष्य के हिसाब से ढलना
- आगे बदलाव अपनाने की क्षमता सकारात्मक दिखती है, क्योंकि कंपनी के पास मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, विविध ऑर्डर बुक और रेलवे के मॉडर्नाइज़ेशन से जुड़े अवसर हैं। नई टेक्नोलॉजी अपनाने और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी करने की क्षमता से और विस्तार में मदद मिल सकती है, बशर्ते कंपनी काम पूरा करने, सर्टिफिकेशन और ग्राहकों पर निर्भरता से जुड़े जोखिम संभाले।
Acme India Industries IPO पर ताज़ा
इस पेज का डेटा IPO Milega रिसर्च टीम ने मैन्युअल रूप से जांचा है। यह निवेश सलाह नहीं है, और किसी भी निवेश फैसले से हुए नुकसान की जिम्मेदारी IPO Milega नहीं लेता। सिक्योरिटीज़ मार्केट में निवेश बाज़ार जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले पूरे प्रॉस्पेक्टस समेत सभी संबंधित दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें।